मोदी सरकार का खजाना, मिलेगा रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड

RBI की कमाई से भरा मोदी सरकार का खजाना, मिलेगा रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड; इन पैसों का क्या करेगी सरकार

अचानक आपके किसी पुराने पैंट की पॉकेट से नोटों की गड्डी निकल आए या आपकी कंपनी उम्मीद से दोगुना बोनस भेज दे। उस वक्त जैसी फीलिंग आती है, कुछ वैसा ही मोदी सरकार भी महसूस कर रही होगी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने इस साल सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपए लाभांश देने की घोषणा की है। ये रकम उस 1 बिलियन डॉलर के कर्ज से 30 गुना ज्यादा है, जिसके लिए पाकिस्तान IMF के सामने गिड़गिड़ा रहा था।

RBI के पास कहां से आता है इतना पैसा, सरकार को कितना लाभांश जाएगा, ये कैसे तय होता है और सरकार इस पैसे का क्या करती है;

सवाल-1: भारतीय रिजर्व बैंक क्या है और यह काम क्या करता है?

जवाब: भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI भारत का केंद्रीय बैंक है। इसे बैंकों का बैंक भी कहा जाता है। देश की इकोनॉमी को सही तरह से चलाने के लिए RBI 5 प्रमुख काम करता है…

सवाल-2: रिजर्व बैंक में पैसे जमा और निकासी नहीं कर सकते, तो इसकी कमाई कैसे होती है?

जवाब: RBI में अन्य कॉमर्शियल बैंकों की तरह जनता का सोना गिरवी रखकर या लोन देकर ब्याज से कमाई नहीं होती। RBI की कमाई के 3 बड़े जरिए हैं…

1. फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व पर ब्याज: RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार को डॉलर, यूरो, सोने और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड्स यानी IMF में SDRs के रूप में रखता है। फिर इन्हीं को इन्वेस्ट करके कमाई की जाती है। RBI के मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा विदेशी सरकारी बॉन्ड्स या डॉलर में इन्वेस्ट होता है। यह बॉन्ड्स सुरक्षित होते हैं और इन पर ब्याज मिलता है।

उदाहरण- अगर RBI ने 100 बिलियन डॉलर को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में 2% सालाना ब्याज पर इन्वेस्ट किया, तो उसे हर साल करीब 2 बिलियन डॉलर यानी लगभग 16 हजार करोड़ रुपए का ब्याज मिलेगा।

2. सरकारी बॉन्ड्स की खरीद-फरोख्त: RBI भारत सरकार के लिए बैंकर के रूप में काम करता है और सरकारी बॉन्ड्स यानी ट्रेजरी बिल और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट करता है। जब सरकार इन बॉन्ड्स पर ब्याज देती है, तो RBI की कमाई होती है।

उदाहरण- अगर RBI ने 10 हजार करोड़ के सरकारी बॉन्ड्स में इन्वेस्ट किया और उन पर 6% ब्याज मिला, तो RBI को सालाना 600 करोड़ रुपए की इनकम होगी।

3. बैंकों को ब्याज पर लोन देना: RBI कॉमर्शियल बैंकों और अन्य फाइनेंशियल ऑर्गेनाइजेशन को रेपो रेट पर लोन देता है। इस लोन पर मिलने वाला ब्याज भी RBI की इनकम का हिस्सा है।

उदाहरण- अगर RBI ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 1 हजार करोड़ रुपए का लोन 6.5% रेपो रेट पर दिया, तो उसे सालाना 65 करोड़ रुपए का ब्याज मिलेगा।

इसके अलावा RBI…✍️

डॉलर को सस्ता होने पर खरीद लेता है और वैल्यू बढ़ने पर बेच देता है।
बैंकों और फाइनेंशियल ऑर्गनाइजेशंस से लाइसेंसिंग और अन्य फीस लेता है।
डिजिटल पेमेंट सिस्टम यानी UPI, NEFT और RTGS के मैनेजमेंट से इनकम बढ़ाती है।
RBI पुराने नोट जमा कर नए नोट लेने पर करेंसी मैनेज करने के लिए छोटी फीस लेता है।

सवाल-3: RBI को कितना और कैसे प्रॉफिट हुआ, जो केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ लाभांश बांट रहा?

जवाब: IDFC फर्स्ट बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेनगुप्ता कहते हैं, ‘RBI ने अभी तक इनकम का ब्योरा जारी नहीं किया है, लेकिन RBI की इनकम विदेशी मुद्रा लेनदेन, डॉलर की बिक्री और इंटरनेशनल मार्केट में ब्याज दरों की बढ़ोतरी की वजह से हुई होगी।’

इस साल रुपयों की कीमत में उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने के लिए RBI ने बड़े पैमाने पर डॉलर की खरीद-फरोख्त की। फाइनेंशियल ईयर 2024 में डॉलर की ब्रिक्री 153 बिलियन डॉलर थी, जो 2025 में दोगुनी से ज्यादा बढ़कर 399 बिलियन डॉलर हो गई।
जनवरी 2025 में ट्रम्प की नीतियों की वजह से डॉलर की वैल्यू गिर गई, जिससे RBI ने खरीद बढ़ा दी। मार्च-अप्रैल में डॉलर की वैल्यू बढ़ने के बाद इसे बेच दिया। इसके अलावा RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स और अन्य सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट किया। RBI की विदेशी मुद्रा संपत्ति में 1.3% की बढ़ोतरी हुई।
इसके अलावा RBI के पास करीब 14 लाख करोड़ रुपए के सरकारी बॉन्ड्स हैं, जिन पर औसतन 6% से 7% तक सालाना ब्याज मिलता है।
RBI की इनकम में कॉमर्शियल बैंकों को रेपो रेट पर दिए ब्याज की इनकम भी शामिल है। इस साल नकदी की कमी की वजह से बैंकों ने RBI से ज्यादा उधार लिया, जिससे RBI की इनकम बढ़ गई।
इन्वेस्टमेंट गुरु इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक RBI को 2024-25 में करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा होने का अनुमान है, जिसमें से केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपए का डिविडेंड दिया गया। हालांकि असल मुनाफा RBI की रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ये ट्रांसफर FY25 के लिए है, लेकिन यह FY26 के लिए सरकार के अकाउंट में दिखाई देगा। (फाइल फोटो)

सवाल-4: RBI अपनी कमाई के पैसों को कहां-कहां खर्च करती है?

जवाब: RBI की सालाना रिपोर्ट 2023-24 के मुताबिक, RBI के 3 बड़े खर्च हैं…✍️

1. ऑपरेशनल एक्सपेंसेज

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2024 में ऑपरेशनल एक्सपेंसेज पर करीब 20 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए। 2025 के लिए करीब 25 हजार करोड़ रुपए खर्च का अनुमान है।
इसमें अधिकारियों, कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन, कार्यालयों के रखरखाव, बिजली, किराया, डिजिटल पेमेंट सिस्टम, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचों पर खर्च शामिल है।
2. करेंसी की छपाई और डिस्ट्रीब्यूशन

2023-24 में मुद्रा छपाई और वितरण पर RBI ने करीब 5 हजार करोड़ रुपए खर्च किए।
इसमें छपाई के लिए कागज, स्याही, होलोग्राम और प्रिंटिंग मशीनों का खर्च शामिल है।
3. रिस्क से निपटने का फंड

RBI की बैलेंस शीट का 5.5% से 6.5% हिस्सा CRB यानी कंटिन्जेंसी रिस्क बफर होता है। FY25 में RBI ने इसे 7.5% यानी ₹5.25 लाख करोड़ तक बढ़ाया।
ये विदेशी मुद्रा और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कवर करने के लिए होता है।
इसके अलावा RBI ने…

2024 में रेगुलेटरी और सुपरवाइजरी पर करीब 3 हजार करोड़ रुपए खर्च किए।
2024 में करीब 1 हजार करोड़ रुपए रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च किए।
सवाल-5: RBI का डिविडेंड क्या है और 2.69 लाख करोड़ सरकार को क्यों दिया जा रहा है?

जवाब: डिविडेंड या लाभांश वह राशि है, जो RBI अपनी कुल इनकम में से खर्च निकालने के बाद भारत सरकार को देती है। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 24 का इस्तेमाल होता है।

इस धारा के तहत RBI को अपने खर्चे यानी कर्मचारियों की सैलरी, मुद्रा छपाई और अन्य खर्चे निकालने के बाद बची हुई राशि सरकार को देना अनिवार्य है।

23 मई को RBI के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 616वीं मीटिंग हुई। इसमें RBI ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 24 के तहत फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए सरकार को रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपए का डिविडेंड देने को मंजूरी दी।

पिछले फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में RBI ने सरकार को 2.10 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर किया था। यानी, ये पिछले साल की तुलना में 27.4% ज्यादा है।

सवाल-6: RBI से मिले 2.69 लाख करोड़ रुपए का मोदी सरकार क्या करेगी?

जवाब: RBI से मिली 2.69 लाख करोड़ की रकम सरकार कई विकास कार्यों और इकोनॉमी को बैलेंस करने में इस्तेमाल करेगी। जैसे…✍️

फिस्कल डेफिसिट को GDP के 4.5% तक लाएगी: जब सरकार का कुल खर्च, उसकी कुल कमाई से ज्यादा होता है, तो इसे फिस्कल डेफिसिट कहते हैं। हर सरकार इसे कम करना चाहती है। 2025-26 के लिए सरकार ने फिस्कल डेफिसिट को GDP के 4.5% तक करने का टारगेट रखा है।

RBI के डिविडेंड देने से सरकार की कमाई बढ़ जाएगी, जिससे कमाई और खर्च का अंतर भी कम होगा। SBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक RBI का डिविडेंड मिलने से फिस्कल डेफिसिट GDP के 4.2% तक भी कम हो सकता है।

सरकार उधार लेना कम कर देगी: सरकार को डिविडेंड मिलने से उसका रेवेन्यू बढ़ जाएगा, जिससे उसे खर्च के लिए ज्यादा लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिस्कल डेफिसिट कम होने से भी सरकार को ज्यादा लोन नहीं लेना पड़ेगा।
सब्सिडी और वेलफेयर स्कीम्स बढ़ाएगी: अगल सरकार RBI का डिविडेंड मिलने के बाद भी उधार कम नहीं करती, तो उसकी जेब में खर्च करने के लिए पैसा बहुत बढ़ जाएगा। इस पैसे को वेलफेयर स्कीम और गवर्नमेंट सब्सिडी में खर्च किया जा सकता है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट करेगी: बिल्डिंग, सड़कें, ब्रिज, इन्फ्रास्ट्रक्चर यह ऐसी चीजें हैं जिन पर एक बार खर्च करने के बाद वह लंबे समय तक बरकरार रहते हैं। ऐसे खर्चो को कैपिटल स्पेंडिंग कहते हैं। इन चीजों पर खर्च ज्यादा होता है। जब भी सरकार का रेवेन्यू बढ़ता है, वह कैपिटल स्पेंडिंग बढ़ा देती है।

सवाल-7: RBI का सरकार से पैसे देने को लेकर क्या कोई विवाद भी हो चुका है?

जवाब: 2018-19 में RBI और सरकार के बीच पैसे देने को लेकर विवाद की खबरें आई थीं। सरकार अपने फिस्कल डेफिसिट के टारगेट को पूरा करने के लिए RBI के रिजर्व से पैसे चाहती थी। वहीं RBI इमरजेंसी स्थिति के लिए ज्यादा रिजर्व बनाए रखना चाहती थी। इस बीच 2018 में RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया और शक्तिकांत दास RBI के अगले गवर्नर बने।

स्थिति के एनालिसिस के लिए बिमल जालान कमेटी बनी। इस कमेटी ने RBI को कितना सरप्लस रखना चाहिए और कितना वह सरकार को ट्रांसफर कर सकती है, इसका कैलकुलेशन किया। RBI ने कमेटी की सभी सिफारिशें मानते हुए सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड हाई सरप्लस ट्रांसफर कर दिया।

इससे पहले एक दशक तक RBI ने सरकार को 30-65 हजार करोड़ रुपए तक का ही सरप्लस ट्रांसफर किया था।

सवाल-8: अन्य देशों के सेंट्रल बैंक भी क्या अपनी सरकारों को डिविडेंड देते हैं?

जवाबः भारत के RBI की तरह दूसरे देशों में भी सेंट्रल बैंक होते हैं, जो सरकार को अपने प्रॉफिट से डिविडेंड देते हैं। भारत के RBI की तरह अमेरिका में फेडरल रिजर्व है। इसने 2021 में सरकार को 109 बिलियन डॉलर यानी करीब 9.2 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे। इसी तरह ब्रिटेन में बैंक ऑफ इंग्लैंड, कनाडा में बैंक ऑफ कनाडा, जापान में बैंक ऑफ जापान, स्विट्जरलैंड में स्विस नेशनल बैंक हैं, जो सरकार को अपने प्रॉफिट का हिस्सा ट्रांसफर करते हैं।

Recommended For You

About the Author: fbadmin