Aapni Awaj
टॉप न्यूज़ BIKANER STATE DESH / VIDESH POLITICS VASTU LIFE STYLE RECIPE JYOTISH
होम देखें ई-पेपर
मेनू
हिंदी / BIKANER

बीकानेर प्रशासन द्वारा पूर्व कलेक्टर के आदेशों को नजरअंदाज करने और CMHO कार्यालय पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

21 May 2026, 09:38 AM
Share
बीकानेर प्रशासन द्वारा पूर्व कलेक्टर के आदेशों को नजरअंदाज करने और CMHO कार्यालय पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

बीकानेर। जिले मे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के आदेशों की अनदेखी करने, जिला कलेक्टर को गुमराह करने और पूर्व जिला कलेक्टर के हस्ताक्षरित आदेशों को नजरअंदाज करने का एक गंभीर मामला बीकानेर के स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमले से जुड़ा सामने आया है

इस पूरे कागजी जालसाजी और सिस्टम की खामियों का पर्दाफाश सहायक लैब तकनीशियन किशन गोपाल छंगाणी द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों, आरटीआई (RTI) दस्तावेजों और जिला कलेक्टर को सौंपे गए कड़े शिकायती पत्र से हुआ बताया जा रहा है, मामले में मुख्यमंत्री महोदय के आदेश का हवाला देते हुए प्रमाणित प्रतिलिपि भी पेश की गई है।

प्रमुख खुलासे और आरोप:

जनसुनवाई या ‘जन-उत्पीड़न’? रसीद नंबर 21 का धोखा

छंगाणी के आरोप है कि पूर्व जिला कलेक्टर महोदया ने पत्रांक: सीबी/सतर्कता/पीजी 98/25/513 (दिनांक 30.03.26) पर हस्ताक्षर कर जिस फाइल को जांच के लिए आगे बढ़ाया था, उसे संबंधित अधिकारियों ने दबा दिया। दिनांक 16/04/2026 की जनसुनवाई में परिवादी को रसीद क्रमांक 21 थमाकर केवल औपचारिकता पूरी की गई। आरोप है कि परिवादी द्वारा प्रगति पूछने पर बताया गया कि जिला कलेक्टर इस प्रकरण को सतर्कता समिति में दर्ज ही नहीं करना चाहते।

बिना रेफरेंस नंबर नियुक्ति और ‘लुआ-छिपी’

इस पूरे मामले की जड़ें साल 2019 में अनुबंधित प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए हुई नियुक्तियों से जुड़ी बताई जा रही हैं।

  • दस्तावेजों में खामियां: नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी वैध ‘रेफरेंस नंबर’ के नियुक्ति पत्र बांटे जाने और अनुभव प्रमाण पत्रों पर सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर न होने का आरोप है।
  • बिना ‘सर्विस ब्रेक’ और एग्रीमेंट: नियमानुसार संविदाकर्मी के लिए वैध एग्रीमेंट और ‘सर्विस ब्रेक’ अनिवार्य है, लेकिन आरोप है कि बिना एग्रीमेंट और ब्रेक के कर्मचारी को संविदाकर्मी मानकर लाभ दिया जा रहा है।
  • फाइल दबाने का आरोप: आरटीआई दस्तावेजों के विपरीत जाकर 08/04/2026 को कथित तौर पर एक मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार की गई। कलेक्टर कार्यालय द्वारा मांगे गए जवाब को सीएमएचओ बीकानेर द्वारा 4 महीने 26 दिन तक दबाए रखने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।

आरटीआई और ई-मेल को किया दरकिनार

शिकायतकर्ता का कहना है कि आधिकारिक सरकारी ई-मेल और सूचना का अधिकार (RTI) से मिले दस्तावेज विभाग में चल रही अनियमिताओं की गवाही दे रहे हैं। आरोप है कि सतर्कता शाखा (Vigilance Cell) के अधिकारी निष्पक्ष जांच करने के बजाय बचाव पक्ष की तरह काम कर रहे हैं और मुख्यमंत्री महोदय को गलत तथ्य भेजकर जिला प्रशासन की छवि धूमिल कर रहे हैं।

जिला कलेक्टर से की गई ये मांगें:

इस मामले को लेकर अब आर-पार की जंग छिड़ चुकी है। पीड़ित ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि:

​कलेक्टर को गुमराह करने वाले सीएमएचओ कार्यालय के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

​इस पूरे प्रकरण की पत्रावली को सतर्कता शाखा से तुरंत वापस मंगवाकर, जिला कलेक्टर स्वयं असली और प्रमाणित दस्तावेजों से इसका मिलान करें।

गैलरी (Gallery)

Gallery Image
इस खबर को दोस्तों के साथ शेयर करें
WhatsApp Facebook