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पीबीएम अस्पताल में कांग्रेस का हल्लाबोल, 10 जून तक सुधार नहीं हुआ तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

05 Jun 2026, 02:38 PM
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पीबीएम अस्पताल में कांग्रेस का हल्लाबोल, 10 जून तक सुधार नहीं हुआ तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

Bikaner News: पीबीएम अस्पताल में कांग्रेस का हल्लाबोल, 10 जून तक सुधार नहीं हुआ तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

Bikaner News: बीकानेर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीबीएम में व्याप्त अव्यवस्थाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और कथित भ्रष्टाचार को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग के नेतृत्व में आयोजित "हल्लाबोल" कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पीबीएम अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे, लेकिन उन्हें अस्पताल परिसर में ही रोक दिया गया। इसके बाद माहौल गर्मा गया और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन तथा पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

ज्ञापन देने पहुंचे कार्यकर्ताओं को रोका गया

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अस्पताल प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अधीक्षक कार्यालय तक जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच कई बार तीखी बहस और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया। हालांकि बाद में मामला शांत कराया गया और प्रदर्शन समाप्त हुआ।

बिशनाराम सियाग ने लगाए गंभीर आरोप

देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने कहा कि पीबीएम अस्पताल में मरीजों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो रही हैं। अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था, चिकित्सा उपकरणों की कमी और कथित भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस लंबे समय से आवाज उठा रही है।

उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई मेडिसिन विंग का आमजन को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। मरीजों और उनके परिजनों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सियाग ने आरोप लगाया कि केवल ज्ञापन देने के लिए पहुंचे कार्यकर्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

10 जून तक सुधार नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि 10 जून तक पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल कांग्रेस का नहीं बल्कि आम जनता के हितों की लड़ाई होगा।

सियाग ने कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को रोजाना अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।

यूथ कांग्रेस ने भी उठाए सवाल

यूथ कांग्रेस देहात अध्यक्ष भंवरलाल कूकणा ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पीबीएम में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है। उन्होंने दावा किया कि मरीजों को कई बार अस्पताल से मिलने वाली जरूरी चिकित्सा सामग्री भी बाहर से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।

कूकणा ने कहा कि कभी मरीजों को कैनुला बाहर से खरीदनी पड़ती है तो कभी प्लास्टर जैसी बुनियादी सामग्री भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं होती। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।

बड़ी संख्या में पहुंचे कांग्रेस नेता

प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता आनंद जोशी, भंवरलाल कूकणा, सुभाष स्वामी, प्रहलाद सिंह मार्शल, पार्षद प्रतिनिधि अब्दुल सतार, शिवलाल गोदारा, आनंद सिंह सोढ़ा, एनएसयूआई अध्यक्ष श्रीकृष्ण गोदारा, रामदयाल बेनीवाल सहित विभिन्न ब्लॉक और मंडल अध्यक्ष मौजूद रहे।

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने अस्पताल प्रशासन से जवाबदेही तय करने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की।

पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं पर लगातार उठ रहे सवाल

गौरतलब है कि बीकानेर संभाग का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के कारण पीबीएम में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। पिछले कुछ समय से अस्पताल में व्यवस्थाओं, स्टाफ की कमी, दवाइयों की उपलब्धता और अन्य सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

कांग्रेस का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो मरीजों को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

क्या होगा आगे?

अब सभी की नजर अस्पताल प्रशासन और जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। कांग्रेस ने 10 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। यदि इस अवधि में मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो अस्पताल परिसर और जिला मुख्यालय पर बड़े स्तर पर आंदोलन की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम तय करेंगे कि मामला शांत होता है या आंदोलन और तेज होता है।

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