सोलर पैनल सिस्टम पर भारत सरकार द्वारा सब्सिडी – Subsidy on Solar Panel

MNRE (मिनिस्ट्री ऑफ़ नई एंड रिन्यूएबल एनर्जी  – केंद्र सरकार) ने 31 मार्च 2022 तक 227 गीगावाट (22,70,00,000 किलोवाट) सोलर सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने  कई तरीकों से सोलर को बढ़ावा दे रही है | भारत सरकार ने केवल सोलर सब्सिडी के लिए 5000 करोड़ रुपीय का बजट तैयार किआ है । सोलर पैनल सिस्टम पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए सभी विवरण और प्रक्रिया निम्नानुसार हैं:

कितनी सोलर सब्सिडी उपलब्ध है?

MNRE के द्वारा नवीनतम अधिसूचना के अनुसार 30%  से  90% सब्सिडी उपभोक्ता के लिए बची है |

  • सोलर पम्पिंग सिस्टम पर 90% सब्सिडी किसान के लिए |
  • पहाड़ी राज्य के लिए 70% सब्सिडी | (सिर्फ हिमाचल प्रदेश , उत्तराखंड , जम्मू और कश्मीर)
  • पुरे भारत के राज्य के लिए 30 % सब्सिडी|

सोलर पर सब्सिडी किसे मिल सकती है?

सभी निम्नलिखित श्रेणी के उपभोक्ता सब्सिडी मिल सकती है|

  • घरेलु – सभी रेसिडेंटल होम ओनर्स सब्सिडी पा सकते है|
  • सोशल सेक्टर – सभी पंजीकृत सोसाइटी, मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट, कोआपरेटिव ग्रुप सॉईटीएस  सब्सिडी पा सकते है|
  • स्कूल , कॉलेज, इंस्टिट्यूट सब्सिडी पाने के पत्र है |
  • नॉन प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन – सभी नॉन प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन पुराने घर व अनलालय सब्सिडी पा सकते है|

रिटर्न ओन इन्वेस्टमेंट – ROI – ऑन सोलर

रेजिडेंट और कमर्शियल ग्राहक अपने बिजली का बिल 1,500 रुपय प्रति महीना देते है , उन्हें अपने बिजली का बिल  30% से 40% बचने के लिए ग्रिड(सरकारी बिजली) से जुड़ सोलर नेट मीटरिंग  सिस्टम  के बारे में  सोचना चाहिए । विवरण के लिए  निचे दिए गए ROI के  हिसाब को देखे :

सोलर प्लांट सोलर प्लांट की कीमत सरकरी सब्सिडी सब्सिडी के बाद कीमत यूनिट प्रति महीना बचत प्रति महीना रिटर्न ओन इन्वेस्टमेंट
1KW 75,000 20,000 55,000.00 120 960 4.5 साल
2KW 1,40,000 40,000 1,00,000 240 1920 4.5 साल
3KW 2,10,000 60,000 1,50,000.00 360 2880 4.5 साल
4KW-1P 2,50,000 80,000 1,70,000 480 3840 4 साल
5KW-1P 3,20,000 1,00,000 2,50,000 600 4800 4 साल
10KW-3P 5,80,000 1,74,000 4,06,000.00 1440 11,520 3 साल

यह अनुमानित अनुमान  है .

नेट मीटरिंग के फायदे:

ग्रिड कनेक्टेड सोलर फोटोवोल्टिक में , सोलर एनर्जी बिल्डिंग के लोड को  उठाती  है जो की (सरकारी बिजली) ग्रिड से जुड़ा होता है सर्प्लस एनर्जी को ग्रिड में फीड किए जाने और ग्रिड से निकाले जाने वाली कमी के साथ एक सर्विस कनेक्शन के माध्यम से जुड़े होते हैं।

ज्यादा ऊर्जा का उत्पादन तब हो सकता है जब बिल्डिंग का लोड सोलर ऊर्जा  उत्पादन से कम हो । एक्स्ट्रा  बिजली सरकारी  ग्रिड में जमा हो जाएगी । रात के समय या जब दिन में बिल्डिंग का लोड सोलर ऊर्जा से अधिक हो जाता है तो बिजली सरकारी ग्रिड से निकलती है ।

क्या सभी सोलर पैनल  पर सब्सिडी उपलब्ध है ?

नहीं , सब्सिडी  सिर्फ भारत में बनने वाले सोलर पैनल  पर उपलब्ध है जो की  ग्रिड (सरकारी बिजली) से जुड़ा होता है । ।सभी निचे दिए गए सिस्टम पर सरकारी सब्सिडी उपलब्ध है |

  • सोलर वाटर पंप
  • ओन – ग्रिड सोलर सिस्टम
  • हाइब्रिड सोलर सिस्टम

सोलर पर सब्सिडी प्राप्त करने की प्रक्रिया :

अपने राज्य नोडल एजेंसी के जिला प्रमुख के माध्यम से MNRE को सिस्टम मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग विवरण के साथ तकनीकी और वित्तीय विवरण, संचालन योजना के साथ एक परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करें |

  • MNRE तकनीकी और वित्तीय बिंदुओं पर आपकी परियोजना का मूल्यांकन करता है |
  • आपके प्रोजेक्ट को MNRE द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद, आपकी राज्य नोडल एजेंसी द्वाराओपन निविदाएं आमंत्रित की जाती हैं और एक प्रक्रिया से एक पार्टनर का चयन किया जाएगा।
  • चैनल पार्टनर इंस्टॉलेशन प्रक्रिया पूरी करता है |
  • SNA आपके इंस्टॉलेशन का निरीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए करता है कि केवल MNRE अनुमोदित घटक ही स्थापित हैं
  • मनरे  सोलर सब्सिडी की राशि को चैनल पार्टनर को दे दी जाती है  |

आप सिस्टम की लागत की 70% देने के जिम्मेदार होंगे यदि अपने सिस्टम फाइनेंस  पर लेना है तो आप बैंक की सहायता ले सकते  है|

एक्सेलरेटेड डेप्रिसिएशन टैक्स बेनिफिट्स:

व्यावसायिक , प्राइवेट और  इंडस्ट्रियल ग्राहक मुलहरास का लाभ उठा सकते है , सोलर पावर परियोजना के पास आयकर अधिनियम 1961 की धारा 32 के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा  मूल्यह्रास लाभ से मुनाफाखोरी का ऑप्शन है ।   कंपनियां टैक्स को काफी कम करने के लिए इसका उपयोग कर सकती हैं। परियोजना के पहले कुछ वर्षों में बोझ, सिस्टम की  लागत का 100% (80% एक्सेरलाते डेप्रिसिएशन और 20% एडिशनल डेप्रिसिएशन) है ।

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80-IA के तहत, केंद्र सरकार 10 साल का कर अवकाश प्रदान करती है, जिसमें लाभार्थी को सिस्टम जीवन के पहले पंद्रह वर्षों में 10 साल की निरंतर अवधि चुनने की आजादी है। टैक्स लाभ परियोजनाओं पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) दर का उपयोग कर कर लगाया जाता है, जो कॉर्पोरेट कर की दर से काफी कम है ।

केंद्र सरकार ने सोलर एनर्जी  उत्पादन उत्पादों के साथ-साथ सोलर एनर्जी उत्पादन परियोजनाओं में उपयोग के लिए आयातित विशिष्ट सामग्रियों पर रियायतें और छूट दी है ।

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