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Rajasthan Panchayat Election: पंचायत-निकाय चुनाव फिर टले! 31 जुलाई की डेडलाइन पर संकट, OBC आरक्षण बना सबसे बड़ा पेंच

05 Jun 2026, 12:28 PM
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Rajasthan Panchayat Election: पंचायत-निकाय चुनाव फिर टले! 31 जुलाई की डेडलाइन पर संकट, OBC आरक्षण बना सबसे बड़ा पेंच

Rajasthan Panchayat Election Update: पंचायत और निकाय चुनावों पर फिर संकट, 31 जुलाई की डेडलाइन के बावजूद तैयारियां अधूरी


जयपुर।राजस्थान प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुट चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक जमीनी तैयारियां शुरू नहीं हो पाई हैं। चुनाव प्रक्रिया फिलहाल विभागों, आयोगों और आरक्षण निर्धारण से जुड़े पत्राचार तक सीमित दिखाई दे रही है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को राज्य सरकार को 31 जुलाई 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए निर्धारित समय सीमा में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।

31 जुलाई की डेडलाइन पर बढ़ा संशय

राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर चुनाव आयोग और संबंधित विभागों के बीच लगातार पत्राचार जारी है। हालांकि अब तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा नहीं हो सकी है।

चुनाव आयोग का स्पष्ट कहना है कि जब तक एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण निर्धारित नहीं हो जाता, तब तक चुनाव कार्यक्रम जारी करना संभव नहीं है।

यही कारण है कि पंचायत और निकाय चुनावों की तारीखों को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

चुनाव आयोग ने भेजा विभागों को पत्र

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखकर आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा है।

आयोग चाहता है कि आरक्षित सीटों की अंतिम सूची जल्द उपलब्ध कराई जाए ताकि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जा सके। लेकिन वर्तमान में यह प्रक्रिया कई स्तरों पर अटकी हुई है।

आयोग के अधिकारियों के अनुसार आरक्षण तय होने के बाद ही वार्ड, पंचायत समिति, जिला परिषद और नगर निकायों की सीटों का अंतिम स्वरूप निर्धारित किया जा सकेगा।

OBC आरक्षण बना सबसे बड़ा पेंच

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों के सामने सबसे बड़ी बाधा फिलहाल ओबीसी आरक्षण को लेकर सामने आ रही है।

सूत्रों के अनुसार एससी, एसटी और महिला वर्ग के आरक्षण को अंतिम रूप देने से पहले ओबीसी आरक्षण तय करना आवश्यक है। क्योंकि ओबीसी सीटों का निर्धारण होने के बाद ही अन्य आरक्षित वर्गों के लिए सीटों का संतुलन और वितरण तय किया जा सकता है।

यही वजह है कि पूरी चुनावी प्रक्रिया OBC आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर हो गई है।

400 से अधिक पंचायतों के आंकड़े अधूरे

राज्य ओबीसी आयोग के अधिकारियों ने बताया है कि उन्हें एससी और एसटी वर्ग से संबंधित अधिकांश आंकड़े मिल चुके हैं, लेकिन अभी भी 400 से अधिक पंचायतों की आबादी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है।

आयोग का कहना है कि पंचायत राज विभाग की ओर से कई क्षेत्रों का डेटा अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। इसके अलावा विभिन्न जिलों से भेजे गए आंकड़ों में भी कई प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं।

इन त्रुटियों को दूर करने के लिए संबंधित विभागों से दोबारा जानकारी मांगी गई है।

डेटा की गड़बड़ियों से बढ़ी परेशानी

जानकारी के अनुसार कई जिलों से प्राप्त जनसंख्या आंकड़ों में गंभीर असंगतियां पाई गई हैं।

कुछ पंचायतों में ओबीसी आबादी का रिकॉर्ड अधूरा है, जबकि कई स्थानों पर उपलब्ध आंकड़ों और वास्तविक स्थिति में अंतर सामने आया है।

इन तकनीकी समस्याओं के कारण आयोग को रिपोर्ट तैयार करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आंकड़ों का सत्यापन जल्द पूरा नहीं हुआ तो चुनाव कार्यक्रम और अधिक आगे खिसक सकता है।

विभागों और आयोगों के बीच लगातार बैठकें

स्थिति को देखते हुए पंचायत राज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और राज्य ओबीसी आयोग के बीच लगातार समन्वय बैठकों का दौर जारी है।

सरकार की कोशिश है कि आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया जल्द पूरी कर चुनाव आयोग को अंतिम रिपोर्ट सौंप दी जाए, लेकिन फिलहाल कोई निश्चित समय सीमा सामने नहीं आई है।

इसी कारण पंचायत और निकाय चुनावों की तारीखों को लेकर राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों में भी असमंजस बना हुआ है।

राजनीतिक दलों ने तेज की तैयारियां

हालांकि प्रशासनिक प्रक्रिया धीमी है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं।

प्रदेश की प्रमुख पार्टियां गांव-गांव और वार्ड स्तर पर संगठनात्मक बैठकों का आयोजन कर रही हैं। संभावित उम्मीदवार भी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो चुके हैं।

विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि सरकार OBC रिपोर्ट की आड़ लेकर चुनावों में देरी कर रही है, जबकि सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट नियमों का पालन करना आवश्यक है।

क्या समय पर हो पाएंगे चुनाव?

राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में OBC आयोग अपनी रिपोर्ट सौंप देता है तो जुलाई के अंतिम सप्ताह तक चुनाव कार्यक्रम जारी किया जा सकता है।

लेकिन यदि आंकड़ों की त्रुटियां और आरक्षण प्रक्रिया में देरी जारी रहती है तो पंचायत और निकाय चुनाव अगस्त या सितंबर तक टल सकते हैं।

फिलहाल राजस्थान के लाखों मतदाताओं और हजारों संभावित उम्मीदवारों की नजर चुनाव आयोग और OBC आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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